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	<title>प्रादेशिक &#8211; Satyakam Post | सत्यकाम पोस्ट</title>
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	<description>Latest News &#38; Information</description>
	<lastBuildDate>Fri, 03 Jul 2026 11:50:32 +0000</lastBuildDate>
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	<title>प्रादेशिक &#8211; Satyakam Post | सत्यकाम पोस्ट</title>
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	<item>
		<title>दिल्ली को मिलेगा प्रदूषण से छुटकारा: सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा ऐलान</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/67491</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:50:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली एनसीआर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली सरकार ने राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने और पर्यावरण को सुधारने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ प्रोजेक्ट की शुरुआत की। यह सात साल की एक लंबी अवधि की योजना है जिसे विश्व बैंक की आर्थिक मदद से पूरी दिल्ली में &#8230;]]></description>
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<p>दिल्ली सरकार ने राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने और पर्यावरण को सुधारने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ प्रोजेक्ट की शुरुआत की। यह सात साल की एक लंबी अवधि की योजना है जिसे विश्व बैंक की आर्थिक मदद से पूरी दिल्ली में लागू किया जाएगा।</p>



<p>मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार इस प्रोजेक्ट का मकसद दिल्ली के वायु प्रदूषण कम करने के प्लान को तेज़ी से लागू करना, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के लक्ष्यों को आगे बढ़ाना और ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न में योगदान देना है। यह प्रोजेक्ट सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक राजधानी के सभी ज़िलों में लागू किया जाएगा और इसकी अनुमानित लागत 8,300 करोड़ रुपये है। विश्व बैंक 65 प्रतिशत फंड देगा जबकि बाकी 35 प्रतिशत खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी।</p>



<p>मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रोजेक्ट की तैयारियों को अंतिम रूप देने और सभी स्टेकहोल्डर्स के बीच तालमेल बिठाने के लिए 10 जुलाई को एक वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। इस वर्कशॉप में अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारी, मुख्य लागू करने वाली एजेंसियां ​​और विश्व बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल होंगे। वे प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए भूमिकाओं, ज़िम्मेदारियों और रोडमैप पर चर्चा करेंगे।</p>



<p>गुप्ता ने कहा कि यह पहल प्रदूषण के मुख्य स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करेगी जिनमें ट्रांसपोर्ट से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल, निर्माण और तोड़-फोड़ (C&amp;D) से निकलने वाला कचरा, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, इंडस्ट्री से निकलने वाला धुआं, हरियाली और जल प्रदूषण शामिल हैं। इसे दिल्ली के भविष्य में एक लॉन्ग-टर्म निवेश बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद न केवल प्रदूषण को रोकना है बल्कि साफ हवा, बेहतर पब्लिक हेल्थ और ज़्यादा सस्टेनेबल शहरी माहौल देना भी है।</p>
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		<item>
		<title>बदरी-केदार धाम: राम मंदिर मामले के बाद चढ़ावे की निगरानी के लिए बीकेटीसी सतर्क</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/67488</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:45:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक]]></category>
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					<description><![CDATA[सीईओ ने मंदिर समिति के अधीन दान भेंट, गिनती स्थल, लेखा खजाना, विश्रामगृह, पूजा काउंटर में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए कि चढ़ावे व दान सामग्री में पारदर्शिता, सतर्कता व निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले का खुलासा होने के &#8230;]]></description>
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<p>सीईओ ने मंदिर समिति के अधीन दान भेंट, गिनती स्थल, लेखा खजाना, विश्रामगृह, पूजा काउंटर में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए कि चढ़ावे व दान सामग्री में पारदर्शिता, सतर्कता व निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</p>



<p>अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले का खुलासा होने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति(बीकेटीसी) भी केदारनाथ व बदरीनाथ के अधीनस्थ मंदिरों में चढ़ावा व दान सामग्री की निगरानी के लिए सतर्क हो गई है। बीकेटीसी के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने चढ़ावे की पारदर्शिता व लेखा जोखा रखने के निर्देश दिए हैं।</p>



<p>बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के दिशा निर्देश पर सीईओ ने मंदिर समिति के अधीन दान भेंट, गिनती स्थल, लेखा खजाना, विश्रामगृह, पूजा काउंटर में तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिए कि चढ़ावे व दान सामग्री में पारदर्शिता, सतर्कता व निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।</p>



<p>इन दिनों चारधाम यात्रा में रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए बदरीनाथ व केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं के चढ़ावे व दान का पूरा लेखा जोखा रखा जाए। किसी तरह की लापरवाही की शिकायत पर मंदिर समिति की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>



<p>मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि राम मंदिर अयोध्या में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद बीकेटीसी ने बदरीनाथ व केदारनाथ सहित अन्य अधीनस्थ मंदिरों में चढ़ावे पर निगरानी व सतर्कता बढ़ाई गई है। अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों से चढ़ावे पर नजर रखी जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>उत्तरकाशी: विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में 400 हेक्टेयर क्षेत्र पर संकट</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/67485</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:42:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तरकाशी का विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, अब लगातार बढ़ते भू-धंसाव और भू-क्षरण की गंभीर चुनौती से जूझ रहा है। कभी मखमली घास से ढके मैदान अब गहरी खाइयों में तब्दील होते जा रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में हो रहे भू-क्षरण &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>उत्तरकाशी का विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, अब लगातार बढ़ते भू-धंसाव और भू-क्षरण की गंभीर चुनौती से जूझ रहा है। कभी मखमली घास से ढके मैदान अब गहरी खाइयों में तब्दील होते जा रहे हैं।</p>



<p>विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में हो रहे भू-क्षरण और भूस्खलन के कारण करीब 400 हेक्टेयर में फैले क्षेत्र पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि इस पर वर्ष 2012-13 की आपदा के बाद से भू-धंसाव होने के कारण खतरा बना हुआ था लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों से धियाणा बुग्याल के समीप नहेटा और चिलपाड़ा में भू-क्षरण के कारण कई खाई बनने लगीं है। यहां से निकलने वाला मलबा हर वर्ष पापड़गाड में आपदा का रूप बनकर आ रहा है।</p>



<p>दयारा बुग्याल समुद्रतल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पिछले कुछ वर्षोंं में बुग्याल के निचले इलाकों धियाणा, बरनाला, गोई सहित नहेटा और चिलपाड़ा आदि क्षेत्र में तेजी से भू-धंसाव होने से वहां पर बड़ी-बड़ी खाई बन रही हैं। इससे दयारा बुग्याल के जैव विविधता पर भी असर पड़ रहा है।</p>



<p>हालांकि वन विभाग की ओर से वर्ष 2020 में वहां पर भारतीय वन्यजीव संस्थान और उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र की ओर से ईको फ्रेंडली तरीके से करीब 600 मीटर क्षेत्र में जूट व नारियल के रेशों से बने केयर नेट व पिरूल के चेक डैम बनाकर क्षरण रोकने की कोशिश की गई। यह उस क्षेत्र में सफल भी रहा लेकिन वर्ष 2024 और 25 में बुग्याल के अन्य क्षेत्रों नहेटा सहित चिलपाड़ा आदि में सबसे अधिक भूस्खलन और भू-धंसाव देखने को मिला है।</p>



<p><strong>विभाग से दूरगामी योजना बनाने की मांग<br></strong>लगातार हो रहे भू-धंसाव के कारण बुग्याल क्षेत्र में बन रही खाई से बहने वाली मिट्टी पापड़गाड नदी में तबाही बनकर बह रहा है। नहेटा में घने जंगलों में भी भू-धंसाव व भूस्खलन के कारण वन संपदा क्षतिग्रस्त हो रही है। दूसरी ओर दयारा बुग्याल ट्रैक के मुख्य पड़ाव धियाणा, बरनाला, गोई आदि तोक के बुग्यालों में मैदानों ने बड़ी खाइयों का रूप ले लिया है।</p>



<p>क्यारक के पूर्व प्रधान विपिन राणा का कहना है कि बुग्याल क्षेत्र में हो रहे भू-धंसाव का असर रैथल और क्यारक गांव सहित गंगोत्री हाईवे तक देखने को मिल रहा है। कई संपत्तियां इस कारण क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। बार्सू प्रधान दीपा रावत का कहना है कि बरनाला क्षेत्र में भी भू-धंसाव व भूस्खलन तेजी से दिख रहा है। इसके लिए वन विभाग से दूरगामी योजना बनाने की मांग की गई है।</p>



<p>उत्तरकाशी वन प्रभाग के डीएफओ डीपी बलूनी का कहना है कि वन विभाग की ओर से लगातार जूट केयर नेट आदि के माध्यम से बुग्याल संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। पूर्व में वहां पर किया गया सुरक्षात्मक कार्य सफल रहा था। इसी तर्ज पर पर भारतीय वन्य जीव संस्थान और विशेषज्ञों के साथ मिलकर दयारा बुग्याल के संरक्षण के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>लखनऊ आम महोत्सव का शुभारंभ, आधा किलो का आम देख मुस्कुराए सीएम योगी</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/67482</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:34:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक]]></category>
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					<description><![CDATA[लखनऊ में आयोजित आम महोत्सव का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट आम उत्पादकों को सम्मानित किया और विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया। महोत्सव में सैकड़ों प्रजातियों के आम तथा उनसे बने उत्पाद प्रदर्शित किए गए। सरकार ने किसानों को आधुनिक खेती, निर्यात, गुणवत्ता और रसायन-मुक्त उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उत्तर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>लखनऊ में आयोजित आम महोत्सव का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट आम उत्पादकों को सम्मानित किया और विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया। महोत्सव में सैकड़ों प्रजातियों के आम तथा उनसे बने उत्पाद प्रदर्शित किए गए। सरकार ने किसानों को आधुनिक खेती, निर्यात, गुणवत्ता और रसायन-मुक्त उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।</p>



<p>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित आम महोत्सव का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने आम उत्पादकों से विभिन्न किस्मों की विशेषताओं की जानकारी ली। प्रदर्शनी में रखे करीब आधा किलो वजनी आम को देखकर मुख्यमंत्री मुस्कुरा पड़े और दोनों हाथों में आम लेकर तस्वीर भी खिंचवाई। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दो पेटी आम खरीदे।</p>



<p>मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट आम उत्पादकों को सम्मानित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का आम ब्रिटेन, यूएई, मलेशिया और कुवैत समेत कई देशों में निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक विशेष आम को “काकोरी ब्रांड” का नाम दिया गया है, जो देशभक्ति और समर्पण का प्रतीक है।</p>



<p><strong>800 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए<br></strong>तीन दिवसीय आम महोत्सव में 800 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली, रटौल, लखनऊ सफेदा, अल्फांसो, याकूती, बनाना मैंगो, नूरजहां, लालिमा और टॉमी एटकिंस जैसी प्रसिद्ध किस्में शामिल हैं। वहीं मोदी मैंगो और योगीराज आम भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। महोत्सव में आम से बने अचार, जूस, पल्प और अन्य उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं।</p>



<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में एआई आधारित खेती, ई-कॉमर्स और वैश्विक निर्यात को बढ़ावा देने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने रसायन-मुक्त उत्पादन, गुणवत्ता और वैश्विक मानकों के अनुरूप आम तैयार करने पर जोर देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की असली ताकत उसके किसान हैं और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।</p>



<p><strong>सीएम बोले- यूपी में AI बेस्ड फार्मिंग को आगे बढ़ाना है<br></strong>योगी ने कहा, आम को संरक्षित करने के लिए किसानों को बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हमें यूपी में AI बेस्ड फार्मिंग को आगे बढ़ाना है। ई-कॉमर्स और ग्लोबल एक्सपोर्ट को बढ़ाने के लिए हम काम कर रहे हैं। हमारा प्रयास होना चाहिए कि यूपी का प्रोडक्ट केमिकल-मुक्त हो। आम गुणवत्ता, सुरक्षा और वैश्विक मानकों पर खरा उतर सके, इस पर हमारा ध्यान होना चाहिए।</p>



<p><strong>योगी बोले- हमारी असली ताकत किसान हैं<br></strong>सीएम योगी ने कहा, आम महोत्सव यूपी ही नहीं, बल्कि देश के अन्नदाता किसानों के लिए एक शो-केसिंग का आधार भी है। वे अपने प्रोडक्ट को बायर्स-सेलर्स मीट के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाने का काम कर सकते हैं। जैसे मलिहाबाद का दशहरी आम, जिसे अब जीआई टैग भी मिल चुका है।</p>



<p>जीआई टैग का मतलब है कि दशहरी आम वैश्विक ब्रांड बन चुका है। दुनिया में जहां कहीं भी जाएगा, उसकी पहचान बनी रहेगी। ये जितने भी आम हैं, वे यूपी की ताकत को बढ़ाते हैं। यूपी की असली ताकत किसान हैं, जिनकी वजह से यह महोत्सव संभव हुआ है। प्रदेश में आम के किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए चार पैक हाउस बनाए गए हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>घर बैठे लाखों कमाएंगे ग्रामीण युवा, महीने की एक लाख तक हो सकती इनकम; ‘प्रोजेक्ट गंगा’ से बदलेगी किस्मत</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/67479</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 11:30:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों तक हाईस्पीड इंटरनेट और डिजिटल सेवाएं पहुंचाने के लिए नई पहल शुरू की गई है। चयनित युवाओं को प्रशिक्षण देकर डिजिटल सेवा केंद्र संचालित करने का अवसर मिलेगा। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के लिए प्रोजेक्ट गंगा शुरू किया गया है। इसके तहत 700 से अधिक ग्रामीण &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों तक हाईस्पीड इंटरनेट और डिजिटल सेवाएं पहुंचाने के लिए नई पहल शुरू की गई है। चयनित युवाओं को प्रशिक्षण देकर डिजिटल सेवा केंद्र संचालित करने का अवसर मिलेगा।</p>



<p>प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के लिए प्रोजेक्ट गंगा शुरू किया गया है। इसके तहत 700 से अधिक ग्रामीण युवाओं ने डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर (डीएसपी) बनने के लिए आवेदन किया है। इन युवाओं को सात दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।</p>



<p>प्रशिक्षण के बाद ये युवा अपने गांवों में हाई स्पीड इंटरनेट और विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। सरकार का लक्ष्य न्याय पंचायत स्तर पर 8000 से 10000 डीएसपी तैयार करना है। प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को अपने गांव में ही डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित करने का अवसर मिलेगा।</p>



<p>मुख्यमंत्री युवा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। दावा है कि शुरुआत में डीएसपी की मासिक आय करीब 20 हजार रुपये होगी। यह ग्राहकों की संख्या बढ़ने पर एक लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकती है। गवर्नमेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट (गंगा) परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक हाईस्पीड फाइबर ब्रॉडबैंड पहुंचाना है।</p>



<p><strong>परियोजना के उद्देश्य और सेवाएं<br></strong>इस परियोजना के जरिये गांवों में टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा, ई-गवर्नेंस और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं का विस्तार होगा। स्मार्ट कृषि जैसी सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। इससे ग्रामीणों को प्रमाणपत्र, बैंकिंग और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।</p>



<p>योजना के पहले चरण में 21 जिलों को शामिल किया गया है। इनमें नेपाल सीमा से सटे श्रावस्ती, बहराइच और बलरामपुर जैसे पिछड़े जिलों को प्राथमिकता मिली है। सरकार अगले दो से तीन वर्षों में इस परियोजना का विस्तार करेगी। इसका लक्ष्य प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों और करीब 20 लाख परिवारों तक पहुंचना है। योजना में महिलाओं की 50 फीसदी भागीदारी सुनिश्चित करने का भी लक्ष्य रखा गया है।</p>



<p><strong>अभी तक 700 युवाओं का चयन किया गया<br></strong>स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमाार सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट गंगा राज्य सरकार की महत्याकांक्षी योजना है। कुल 8000 डिजिटल सर्विस प्रोवाइडरों का चयन होगा, जिसके अंतर्गत अभी तक 700 युवाओं का चयन कर लिया गया है।</p>



<p>महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी का लक्ष्य है। ये प्रोजेक्ट ग्रामीण इलाकों को भी शहरों की तरह हाईस्पीड ब्राडबैंड सेवाओं से जोड़ेगा, जो ग्रामीण क्षेत्रों की प्रगति में अहम भूमिका निभाएगा।</p>
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