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	<title>स्वास्थ्य &#8211; Satyakam Post | सत्यकाम पोस्ट</title>
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	<lastBuildDate>Sun, 17 May 2026 06:45:30 +0000</lastBuildDate>
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	<title>स्वास्थ्य &#8211; Satyakam Post | सत्यकाम पोस्ट</title>
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	<item>
		<title>हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए इन 5 आदतों में भी करें सुधार</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/65824</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 17 May 2026 06:45:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[हाई ब्लड प्रेशर एक ऐसी बीमारी है, जो सालों तक बिना किसी लक्षण के शरीर में पनपती रहती है। यही वजह है कि इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया जाए, तो यह हमारे दिल, दिमाग और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाकर जानलेवा साबित हो सकता है। इसी गंभीरता &#8230;]]></description>
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<p>हाई ब्लड प्रेशर एक ऐसी बीमारी है, जो सालों तक बिना किसी लक्षण के शरीर में पनपती रहती है। यही वजह है कि इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया जाए, तो यह हमारे दिल, दिमाग और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाकर जानलेवा साबित हो सकता है।</p>



<p>इसी गंभीरता को समझते हुए वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे 2026 की थीम कंट्रोलिंग हाइपरटेंशन टुगेदर रखी गई है। इसका सीधा-सा संदेश है कि हम सब मिलकर अपने खान-पान और लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके अपने ब्लड प्रेशर और सेहत की रक्षा कर सकते हैं।</p>



<p>आइए, डॉ. अपेक्षा एकबोटे (चीफ डाइटिशियन, नेफ्रोप्लस) से जानते हैं उन आसान, लेकिन असरदार आदतों के बारे में, जिन्हें अपने रूटीन में शामिल कर आप इस साइलेंट किलर से खुद को बचा सकते हैं।</p>



<p><strong>नमक और पैकेज्ड फूड से बनाएं दूरी<br></strong>हमारे शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ने का एक सबसे बड़ा कारण है ज्यादा नमक खाना। हमें दिनभर में 5 ग्राम (लगभग एक छोटा चम्मच) से कम नमक खाने का लक्ष्य रखना चाहिए। याद रखें, इसमें चिप्स, नमकीन, अचार, पापड़, सॉस और इंस्टेंट नूडल्स जैसे पैकेजों में छिपा हुआ नमक भी शामिल है।</p>



<p>आप इन नमकीन स्नैक्स की जगह भुने चने, स्प्राउट्स, वेजीटेबल कटलेट या सादे नट्स खा सकते हैं। इसके अलावा, दाल और सब्जियों में ऊपर से नमक डालने के बजाय नींबू, जीरा, अजवाइन, लहसुन और हर्ब्स का इस्तेमाल करके स्वाद बढ़ाएं।</p>



<p><strong>फल, सब्जियां और साबुत अनाज चुनें</strong><br>पौधों से मिलने वाले फूड्स ब्लड प्रेशर को कम करने और दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। अपनी डाइट में रोजाना 2 से 3 सर्विंग्स फलों की और 3 से 4 सर्विंग्स सब्जियों की जरूर शामिल करें। इसके साथ ही, मैदे से बनी ब्रेड और सफेद चावल की जगह साबुत अनाज जैसे ब्राउन राइस, ओट्स, रागी, ज्वार, बाजरा और चोकर वाले गेहूं की रोटी को अपने खाने का हिस्सा बनाएं।</p>



<p><strong>सही फैट चुनें और तली-भुनी चीजों से बचें</strong><br>खाना पकाने के लिए सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी या राइस ब्रान जैसे वेजिटेबल ऑयल का सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें। तेल को बार-बार गर्म करके तलने के लिए इस्तेमाल करने से बचें। समोसा, कचौड़ी, भजिया, सेव और भारी मिठाइयों जैसी तली-भुनी चीजों से दूरी बनाएं और उनकी जगह भाप में पके या बेक की हुई डिशेज का आनंद लें। खाना बनाते समय बोतल से सीधा तेल डालने के बजाय चम्मच से नापकर ही इस्तेमाल करें।</p>



<p><strong>पोटैशियम से भरपूर चीजें खाएं</strong><br>पोटैशियम हमारे शरीर में सोडियम के स्तर को संतुलित रखता है, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। इसके लिए अपने रोज के खान-पान में केला, चीकू, संतरा, नारियल पानी, हरी पत्तेदार सब्जियां, आलू, बीन्स और रागी को नियमित रूप से शामिल करें।</p>



<p><strong>चीनी, कैफीन और अल्कोहल को कहें ना</strong><br>ज्यादा चीनी और शराब से न सिर्फ वजन बढ़ाता है, बल्कि ब्लड प्रेशर भी गंभीर रूप से प्रभावित होता है। इसलिए सोडा, पैक्ड जूस, मिठाई और बेकरी की चीजों से परहेज करें। साथ ही, शराब बिल्कुल न पिएं।</p>



<p><strong>एक्टिव रहें और वजन कंट्रोल करें</strong><br>फिजिकल एक्टिविटी का ब्लड प्रेशर से सीधा कनेक्शन है। अपने वजनऔर बीपी को काबू करने के लिए रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट ब्रिस्क वॉक, योग या कोई भी हल्की एक्सरसाइज करें।</p>
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		<item>
		<title>क्या प्लेटलेट्स नॉर्मल होने पर भी खतरनाक हो सकता है डेंगू का बुखार? </title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/65772</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 May 2026 05:01:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[डेंगू को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि यह बीमारी केवल तभी खतरनाक होती है जब मरीज के प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगते हैं। मेदांता नोएडा के इंटरनल मेडिसिन के एसोसिएट कंसल्टेंट, डॉ. सौरदीप चौधरी&#160;के अनुसार, लोग अक्सर सिर्फ प्लेटलेट्स की संख्या पर ध्यान देते हैं और उन अन्य जरूरी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>डेंगू को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि यह बीमारी केवल तभी खतरनाक होती है जब मरीज के प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगते हैं।</p>



<p><em><strong>मेदांता नोएडा के इंटरनल मेडिसिन के एसोसिएट कंसल्टेंट, डॉ. सौरदीप चौधरी</strong></em>&nbsp;के अनुसार, लोग अक्सर सिर्फ प्लेटलेट्स की संख्या पर ध्यान देते हैं और उन अन्य जरूरी लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं जो बीमारी के गंभीर होने का संकेत देते हैं। सच्चाई यह है कि प्लेटलेट्स नॉर्मल होने पर भी डेंगू खतरनाक रूप ले सकता है। आइए जानते हैं कैसे।</p>



<p><strong>प्लेटलेट्स ठीक होने के बाद भी बढ़ सकती है मुसीबत<br></strong>एडीज मच्छरों के काटने से फैलने वाला डेंगू वायरस हर मरीज पर अलग-अलग तरह से असर डालता है। बीमारी की गंभीरता केवल प्लेटलेट्स पर निर्भर नहीं करती। कई मरीजों में प्लेटलेट्स का स्तर ठीक होने के बावजूद उन्हें प्लाज्मा लीकेज, शरीर से खून बहने, लिवर से जुड़ी समस्याओं, सांस लेने में तकलीफ या &#8216;शॉक&#8217; जैसी गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।</p>



<p>इसलिए, केवल रिपोर्ट में प्लेटलेट्स के नंबर देखने के बजाय मरीज की पूरी शारीरिक स्थिति पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। कुछ चेतावनी वाले लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें किसी भी हालत में अनदेखा नहीं करना चाहिए। इनमें लगातार उल्टी होना, पेट में तेज दर्द, अत्यधिक कमजोरी महसूस होना, बेचैनी, नाक या मसूड़ों से खून आना, पेशाब कम आना और सांस फूलना शामिल हैं।</p>



<p><strong>बुखार उतरते ही डेंगू के मरीज को न समझें ठीक<br></strong>मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह समझना भी बहुत जरूरी है कि डेंगू का सबसे क्रिटिकल फेज तब शुरू होता है जब बुखार उतरने लगता है। यह समय आमतौर पर बीमारी के तीसरे से सातवें दिन के बीच आता है। ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि बुखार कम होने का मतलब है कि मरीज ठीक हो रहा है, लेकिन असल में यही वह समय होता है जब मरीज की सबसे करीब से निगरानी करने की जरूरत होती है।</p>



<p><strong>मरीज की पूरी स्थिति देखकर डॉक्टर लेते हैं फैसला<br></strong>प्लेटलेट्स चढ़ाने को लेकर भी लोगों में काफी डर और भ्रम देखा जाता है। डॉ. चौधरी बताते हैं कि कम प्लेटलेट्स वाले हर डेंगू मरीज को बाहर से प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। इसका फैसला केवल प्लेटलेट्स के नंबर देखकर नहीं किया जाता, बल्कि यह मरीज की पूरी स्थिति, डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर, ब्लीडिंग के लक्षणों और शरीर के अन्य अंगों की स्थिति को देखकर तय किया जाता है।</p>



<p><strong>डॉक्टर दे रहे हैं शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देने की सलाह<br></strong>चूंकि, मानसून के मौसम में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए सही समय पर डॉक्टर को दिखाना सबसे अच्छा कदम है। मरीज को भरपूर आराम करना चाहिए और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। सबसे जरूरी बात, बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से कोई दवा न लें। विशेष रूप से इबुप्रोफेन या एस्पिरिन जैसी सूजन और दर्द कम करने वाली दवाइयां बिल्कुल न लें, क्योंकि इनसे शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। प्लेटलेट्स के नंबर के पीछे भागने के बजाय, बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचानें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>रोजाना कॉफी पीने वालों में कम रहता है डिमेंशिया का खतरा</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/65726</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 May 2026 05:35:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[हम में से बहुत से लोगों के दिन की शुरुआत एक गरमा-गरम एस्प्रेसो या कैपेचीनो से होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह रोजाना की आदत आपको एक बहुत बड़ी बीमारी से बचा सकती है? जी हां, हाल ही में सामने आए एक अध्ययन से यह पता चला है कि रोजाना दो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हम में से बहुत से लोगों के दिन की शुरुआत एक गरमा-गरम एस्प्रेसो या कैपेचीनो से होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह रोजाना की आदत आपको एक बहुत बड़ी बीमारी से बचा सकती है?</p>



<p>जी हां, हाल ही में सामने आए एक अध्ययन से यह पता चला है कि रोजाना दो से तीन कप कॉफी पीने से उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।</p>



<p><strong>कैसे काम करती है कॉफी?<br></strong>शोधकर्ताओं के अनुसार, कॉफी में मौजूद कैफीन हमारे दिमाग की कोशिकाओं को सक्रिय रखने में बेहद मददगार है। इतना ही नहीं, यह अल्जाइमर से जुड़ी सूजन और दिमाग में जमा होने वाले हानिकारक प्लाक को भी कम करने में सहायता करता है। इसका मतलब यह है कि रोजाना कॉफी पीने की आदत आपको सिर्फ ताजगी और ऊर्जा ही नहीं देती, बल्कि आपके दिमाग की रक्षा भी करती है।</p>



<p><strong>क्या कहता है 43 साल लंबा अध्ययन?<br></strong>इस बात को साबित करने के लिए अमेरिका में एक बहुत बड़ा शोध किया गया। इस शोध में 1,31,821 नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों को शामिल किया गया। इन सभी लोगों पर पूरे 43 सालों तक नजर रखी गई। जब यह अध्ययन शुरू हुआ, तब प्रतिभागियों की उम्र 40 वर्ष के आसपास थी। अध्ययन के दौरान लगभग 11,033 लोगों (यानी कुल लोगों का 8 प्रतिशत) में डिमेंशिया की समस्या देखी गई।</p>



<p>हालांकि, शोधकर्ताओं ने एक बहुत ही दिलचस्प बात नोटिस की। जो लोग नियमित रूप से कैफीनयुक्त कॉफी या चाय का सेवन करते थे, उनमें डिमेंशिया विकसित होने की संभावना काफी कम थी। इस आदत का सबसे अधिक फायदा 75 वर्ष और उससे कम आयु के वयस्कों में देखा गया।</p>



<p><strong>हर चीज की बुरी है अति<br></strong>विज्ञानियों ने इसके फायदों के साथ-साथ एक जरूरी सलाह भी दी है। उनका कहना है कि मध्यम मात्रा में कॉफी या चाय पीना ही फायदेमंद है। अगर आप यह सोचकर बहुत ज्यादा कॉफी पीने लगेंगे कि इससे ज्यादा फायदा होगा, तो यह गलत है। हद से ज्यादा कॉफी पीने से इसका यह सुरक्षात्मक प्रभाव कम होने लगता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या है पल्मोनरी एम्बोलिज्म, जिससे हुआ प्रतीक यादव को कार्डियक अरेस्ट? </title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/65680</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 04:46:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[बुधवार सुबह प्रतीक यादव की मौत की खबर ने सभी हैरान कर दिया। इस खबर के सामने आने के बाद से ही लोग उनकी मौत को लेकर अलग-अलग कयास लगा रहे थे। ऐसे में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रतीक की मौत की वजह साफ हो गई है।&#160; पोस्टमार्टम में पता चला &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>बुधवार सुबह प्रतीक यादव की मौत की खबर ने सभी हैरान कर दिया। इस खबर के सामने आने के बाद से ही लोग उनकी मौत को लेकर अलग-अलग कयास लगा रहे थे। ऐसे में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रतीक की मौत की वजह साफ हो गई है।&nbsp;</p>



<p>पोस्टमार्टम में पता चला कि प्रतीक की मौत पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण हुए कार्डियक अरेस्ट से हुई है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में पल्मोनरी एम्बोलिज्म के बारे में जानेंगे कि यह कंडीशन क्या होती है और किन लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है?</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या है पल्मोनरी एम्बोलिज्म?</h3>



<p>क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक पल्मोनरी एम्बोलिज्म (पीई) एक खून का थक्का है, जो शरीर के किसी अन्य हिस्से से फेफड़ों तक पहुंचकर ब्लड फ्लो को ब्लॉक कर देता है। आमतौर पर, यह थक्का पैर या पेल्विस की किसी नस में बनना शुरू होता है। बाद में यह टूटकर ब्लड फ्लो में बहता हुआ फेफड़ों तक पहुंचता है, जहां यह किसी ब्लड वेसल्स में फंस जाता है और ब्लड फ्लो को ब्लॉक कर देता है।</p>



<p><strong>पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लक्षण<br></strong>सीने में तेज दर्द, जो हिलने-डुलने या गहरी सांस लेने पर बढ़ जाता है<br>अचानक सांस फूलना, यहां तक कि आराम करते समय भी<br>तेज सांस लेना<br>खांसी, कभी-कभी खून भी आ सकता है<br>घरघराहट<br>पीली, चिपचिपी या नीली त्वचा<br>तेज दिल की धड़कन<br>चक्कर आना<br>बेहोशी</p>



<p>पीई के लक्षण आमतौर पर अचानक शुरू होते हैं। हालांकि, फेफड़ों तक पहुँचने वाले रक्त के थक्के के लक्षणों में पैर में दर्द, सूजन और गर्मी शामिल हो सकते हैं। इन लक्षणों को भी गंभीरता से लें और तुरंत चिकित्सा सहायता लें।</p>



<p><strong>पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण?<br></strong>पल्मोनरी एम्बोलिज्म तब होता है, जब खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाता है। ज्यादातर मामलों में, खून का थक्का डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) से शुरू होता है। यह तब होता है, जब आपके शरीर के अंदरूनी हिस्से में मौजूद किसी नस में, आमतौर पर आपके पैर में, खून का थक्का जम जाता है।</p>



<p><strong>किन समस्याओं का कारण बनता है पीई<br></strong>दिल का अचानक रुक जाना (कार्डियक अरेस्ट)<br>शरीर में ब्लड फ्लो में खतरनाक गिरावट (ऑब्सट्रक्टिव शॉक)<br>ब्लड फ्लो की कमी से फेफड़ों के टिश्यूज का मर जाना (पल्मोनरी इन्फार्क्शन)<br>किन लोगों को है ज्यादा खतरा<br>हार्ट डिजीज होने पर<br>कुछ तरह के कैंसर<br>सर्जरी<br>ब्लड क्लॉट को प्रभावित करने वाले डिसऑर्डर<br>कोविड-19</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पानी की कमी से गर्मियों में बढ़ सकती है पेट की गर्मी और गैस!</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/65632</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 May 2026 04:33:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[अगर पेट में लगातार दर्द बना रहता है तो इसे अनदेखा न करें। जल्द से जल्द किसी कुशल चिकित्सक से आपको संपर्क करना चाहिए। गर्मी के दिनों में उच्च तापमान और शरीर में पानी की कमी अर्थात डिहाइड्रेशन के कारण पेट संबंधी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं। यही नहीं इन दिनों शरीर से पसीने के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अगर पेट में लगातार दर्द बना रहता है तो इसे अनदेखा न करें। जल्द से जल्द किसी कुशल चिकित्सक से आपको संपर्क करना चाहिए। गर्मी के दिनों में उच्च तापमान और शरीर में पानी की कमी अर्थात डिहाइड्रेशन के कारण पेट संबंधी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं। यही नहीं इन दिनों शरीर से पसीने के रूप में भी काफी मात्रा में पानी निकल जाता है।</p>



<p>पानी की कमी होने पर पेट के अंदर बैड बैक्टीरिया को पनपने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है। इस कारण पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। शरीर में पानी की कमी के कारण पेट में एसिड की मात्रा भी काफी बढ़ जाती है। इससे पेट और सीने में जलन होने लगती है। पानी की कमी होने पर कब्ज की समस्या भी बढ़ जाती है। इसके साथ ही ब्लोटिंग अर्थात पेट फूलने और पेट में गैस बनने की समस्या भी सामने आती है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">खानपान में सतर्कता है जरूरी</h3>



<p>गर्मी के दिनों ज्यादा फैट वाले भोजन का प्रयोग करना भी हानिकारक साबित हो सकता है। ज्यादा फैट युक्त भोजन का सेवन करने से अपच संबंधी समस्या सामने आ सकती हैं। इससे पेट में जलन की समस्या भी बढ़ सकती है। गर्मी के दिनों में बहुत से लोग आइसक्रीम और अन्य ठंडे पेय पदार्थों का यह सोचकर सेवन बढ़ा देते हैं कि ये तो ठंडे पदार्थ हैं, लेकिन ठंडे तापमान और शक्कर की अधिक मात्रा का संयोजन पेट संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। यही नहीं जो लोग लैक्टोज या डेयरी उत्पादों के प्रति संवेदनशील हैं, उनके लिए भी ये खाद्य पदार्थ पेट में गैस, ऐंठन और दस्त का कारण बन सकते हैं।</p>



<p><strong>पेट संबंधी समस्याओं से ऐसे होगा बचाव<br></strong>अगर आपको किडनी संबंधी और पेट संबंधी अन्य कोई समस्या नहीं है तो गर्मी के दिनों में दिनभर में कम से कम ढाई से तीन लीटर पानी अवश्य पिएं।<br>इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करने के लिए नींबू की शिकंजी, नारियल पानी या ओआरएस का घोल लें। नारियल पानी पेट के पीएच स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है।<br>ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थों का भरपूर सेवन करें, जैसे दही, छाछ, रायता, लस्सी। इनसे पेट की गर्मी शांत होती है और पाचनतंत्र सही रहता है।<br>पेट और पाचनतंत्र को सही रखने के लिए मौसमी फलों का सेवन अवश्य करें, जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी आदि। इनमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाती है।<br>गर्मी के दिनों में बाहर का खाना खासकर स्ट्रीट फूड खाने से अवश्य बचें।<br>बाहर के खाने के बजाय घर का बना ताजा खाना खाएं। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि खाना हल्का अर्थात जल्दी पचने वाला हो, उसमें तेल-मसाले का प्रयोग कम किया गया हो।</p>



<p><strong>बनाएं दूरी<br></strong>बहुत अधिक मात्रा में चाय या काफी का सेवन न करें।<br>विभिन्न प्रकार के कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम से कम करें।<br>डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें।<br>अधिक तैलीय भोजन का सेवन न करें।</p>



<p><strong>पेट की गर्मी बढ़ने के कारण<br></strong>मसालेदार और अधिक तैलीय भोजन का सेवन, इससे पेट में एसिड की मात्रा बढ़ जाती है।<br>खानपान में अनियमितता, समय से भोजन न करना, अधिक मात्रा में खा लेना, भोजन का बिल्कुल सेवन न करना, देर रात भोजन करना, इससे पाचनतंत्र प्रभावित होता है।<br>शरीर में पानी की कमी, कम मात्रा में पानी पीने से पाचनक्रिया खराब होती है और एसिडिटी की मात्रा भी बढ़ जाती है।<br>शरीर में अधिक कैफीन का पहुंचना, इससे पेट की अंदरूनी परत में जलन होने लगती है।<br>तनाव और चिंता, इनसे भी शरीर में एसिड का उत्पादन अधिक मात्रा में होने लगता है। इससे पेट की गर्मी बढ़ जाती है।<br>नींद की कमी, अपर्याप्त नींद न केवल पाचनक्रिया को प्रभावित करती है, बल्कि पेट के अंदर की गर्मी को भी बढ़ा देती है।</p>



<p><strong>डॉक्टर से मिलें, अगर<br></strong>अगर घरेलू उपायों से पेट संबंधी समस्याओं में आराम न मिले।<br>पेट में जलन लगातार बनी रहे और दर्द भी हो।<br>बार-बार उल्टी या दस्त हों।<br>वजन में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा हो।</p>



<p><strong>घरेलू उपाय हैं बहुत लाभकारी<br></strong>वैद्य अच्युत कुमार त्रिपाठी (सदस्य एवं गुरु राष्ट्रीय आर्युवेद विद्यापीठ) के मुताबिक इस मौसम में जिस प्रकार से प्रकृति में जलीय तत्वों की कमी हो जाती है, ठीक उसी प्रकार से शरीर में। गर्मी में वात, पित्त में असंतुलन हो जाने के कारण उदर संबंधी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए जरूरी है कि हम कुछ घरेलू उपायों पर अमल करें।</p>



<p>इसके लिए रात में थोड़ी सूखी धनिया, कच्चा जीरा और सौंफ को रात में भिगो दें। सुबह इन तीनों को पीस लें। इस मिश्रण से एक चम्मच मात्रा लेकर एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं। आप इसमें ग्लूकोज भी मिला सकते हैं।<br>इस मिश्रण को फ्रिज में स्टोर कर सकते हैं। कच्ची या भुनी हुई सौंफ में थोड़ी सी मिश्री मिलाकर खाने से भी आराम मिलता है।<br>इसी तरह छाछ के साथ सेंधा नमक, भुना पिसा जीरा मिलाकर पीने से भी राहत मिलती है। इनसे भूख भी बढ़ती है।<br>इस मौसम में बेल का मुरब्बा और बेल का शर्बत पीने से भी काफी आराम मिलता है। बेल का पाउडर भी खाया जा सकता है।<br>आजवाइन, जीरा, कलौंजी और एक या दो ग्राम हींग, छोटी हर्र देसी घी में पकाकर पीस लें। इसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिला सकते हैं। खाना खाने के बाद इसे खा सकते हैं।<br>रात में बीज निकालकर मुनक्का को पानी में भिगो दें, सुबह इसे खा सकते हैं। रात में त्रिफला चूर्ण भी खा सकते हैं। इसे पानी या दूध किसी के साथ ले सकते हैं।<br>25 दाने किशमिश, दो अंजीर, पांच टुकड़े अखरोट, पांच बादाम रात में भिगो दें और सुबह नाश्ते पहले इन्हें अच्छी तरह चबाकर खाएं। इसके साथ एक कप दूध ले लें। इससे उदर रोगों के साथ ही कोलेस्ट्राल और ब्लड प्रेशर संबंधी समस्याओं से भी राहत मिलती है साथ ही शरीर को पोषण।<br>इन्हें स्टील, कांच या चीनी मिट्टी के बर्तन में ही भिगोएं। इसके साथ ही तरबूज और खरबूजा का सेवन अवश्य करें। बस, इन्हें खाने के बाद थोड़ी देर तक पानी बिल्कुल न पिएं।<br>आम का पना, गन्ने का रस भी बहुत लाभदायक होता है। हर मौसम में पाए जाने वाले फल, उस ऋतु में होने वाली समस्याओं से राहत दिलाते हैं।</p>
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