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	<title>Satyakam Post | सत्यकाम पोस्ट</title>
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	<description>Latest News &#38; Information</description>
	<lastBuildDate>Fri, 26 Jun 2026 12:18:47 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Satyakam Post | सत्यकाम पोस्ट</title>
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	<item>
		<title>होर्मुज में फिर बढ़ी टेंशन: ओमान ने तेल टैंकरों के लिए खोला नया रूट</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/67210</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 12:18:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं और साठ दिनों के अंतरिम युद्धविराम के दौरान खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर से गहरा गया है। यह नया विवाद ओमान द्वारा तेल टैंकरों के लिए एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग की घोषणा के बाद शुरू हुआ। ईरान ने इस नए मार्ग को लेकर कड़ी चेतावनी जारी &#8230;]]></description>
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<p>अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं और साठ दिनों के अंतरिम युद्धविराम के दौरान खाड़ी क्षेत्र में तनाव फिर से गहरा गया है। यह नया विवाद ओमान द्वारा तेल टैंकरों के लिए एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग की घोषणा के बाद शुरू हुआ। ईरान ने इस नए मार्ग को लेकर कड़ी चेतावनी जारी की थी, लेकिन इसके बावजूद कई जहाज इस रास्ते से गुजरने लगे।</p>



<p>इसी बीच, गुरुवार को इस नए रूट से गुजर रहे एक जहाज पर मिसाइल से हमला किए जाने की खबर सामने आई है। हालांकि, ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन केंद्र ने पुष्टि की है कि इस हमले में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ओमान का टोल-फ्री कॉरिडोर</h2>



<p>ओमान ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन(आईएमओ) के समर्थन से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक अस्थायी समुद्री कॉरिडोर उपलब्ध कराया है। इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इसमें जहाजों से किसी भी प्रकार का ट्रांजिट शुल्क या टोल नहीं लिया जाएगा। दूसरी ओर, ईरान लंबे समय से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा देने के बदले शुल्क वसूलने की वकालत कर रहा था।</p>



<p>ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स(आईआरजीसी) ने ओमान के इस नए मार्ग को पूरी तरह अवैध करार दिया है। आईआरजीसी का स्पष्ट कहना है कि होर्मुज में केवल वे ही मार्ग मान्य होंगे जिन्हें तेहरान ने निर्धारित किया है, और इन रास्तों से बाहर जाने वाले जहाजों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">टोल टैक्स पर अमेरिका का सख्त रुख</h2>



<p>अमेरिका ने ईरान द्वारा टोल वसूलने के किसी भी संभावित प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते में होर्मुज जलसंधि से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की बात शामिल होती है, तो यह अमेरिका को बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं होगा और यह गेम चेंजर साबित होगा।</p>



<p>इसी बीच, बहरीन में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की बैठक में पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी चेतावनी दी कि यदि ईरान यहां टोल लगाता है, तो इसका असर दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण रणनीतिक जलमार्गों पर भी पड़ सकता है।</p>



<p>इसके अलावा, ट्रंप ने ईरान के मिनाब स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में अमेरिका का हाथ होने से इनकार करते हुए कहा कि वहां कई मिसाइलें दागी गई थीं और यह स्पष्ट नहीं है कि वे मिसाइलें किसने दागी थीं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अमेरिकी सीनेट में ट्रंप की जीत</h2>



<p>इन अंतरराष्ट्रीय तनावों के बीच राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को घरेलू राजनीति में एक बड़ी राहत मिली है। ट्रंप की सैन्य शक्तियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में 24 घंटे के भीतर ही गिर गया। मतदान से पहले ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों के साथ बैठक कर नाराजगी जताई थी। इस जीत से व्हाइट हाउस को ईरान के साथ बातचीत में एक मजबूत राजनीतिक बढ़त हासिल हुई है।</p>



<p>वहीं दूसरी ओर, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ लड़ाई में नाटो देशों के असहयोगात्मक रवैये पर कड़ी निराशा जताई है। उन्होंने नाटो प्रमुख मार्क रुटे से स्पेन, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों के रवैये की आलोचना की। अपनी सैन्य ताकत का दावा करते हुए ट्रंप ने यहाँ तक कहा कि अमेरिका चाहे तो वह वेनेजुएला को एक घंटे में और ईरान को महज एक हफ्ते के भीतर खत्म कर सकता है।</p>
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		<item>
		<title>उत्तराखंड और हिमालयी राज्यों में भूकंप के झटके आने से पहले मिलेगा अलर्ट</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/67207</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 12:09:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के पास भी भूकंप की पहले से सटीक भविष्यवाणी करने वाली कोई वैज्ञानिक तकनीक नहीं है। हालांकि, भारत ने हिमालयी क्षेत्र में ऐसे भूकंपीय निगरानी नेटवर्क और क्षेत्रीय भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणालियां विकसित की हैं, जो भूकंप शुरू होने के तुरंत बाद और खतरनाक झटके पहुंचने से कुछ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत के पास भी भूकंप की पहले से सटीक भविष्यवाणी करने वाली कोई वैज्ञानिक तकनीक नहीं है। हालांकि, भारत ने हिमालयी क्षेत्र में ऐसे भूकंपीय निगरानी नेटवर्क और क्षेत्रीय भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणालियां विकसित की हैं, जो भूकंप शुरू होने के तुरंत बाद और खतरनाक झटके पहुंचने से कुछ सेकंड पहले लोगों को अलर्ट कर सकती हैं।</p>



<p>अर्ली वार्निंग सिस्टम को और बेहतर बनाने की दिशा में सबसे सफल प्रयास आईआईटी रुड़की ने उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर किया है। दोनों ने मिलकर भूदेव नाम का एक अत्याधुनिक भूकंप पूर्व चेतावनी ऐप विकसित किया है। यह ऐप भूकंप के खतरों से निपटने और स्थानीय लोगों की सुरक्षा व लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">हिमालयी क्षेत्रों में रियल-टाइम मॉनिटरिंग</h2>



<p>सरकार ने बीते दिसंबर में संसद को बताया था कि पूरे हिमालयी क्षेत्र में अर्ली वार्निंग सिस्टम को समर्पित रियल-टाइम भूकंपीय नेटवर्क शुरू किया गया है। इसके साथ ही, नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी क्षेत्रीय डेटा का उपयोग करके प्रोटोटाइप ईईडब्ल्यू एल्गोरिदम विकसित और टेस्ट कर रहा है।</p>



<p>इसके जरिए पी-वेव की सटीक पहचान, भूकंप की तीव्रता का तेजी से अनुमान और झटके आने से पहले की सटीक भविष्यवाणी की जा सकेगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कैसे काम करता है अर्ली वार्निंग सिस्टम?</h2>



<p>जब भी कोई भूकंप आता है, तो उसमें से पी-वेव्स निकलती हैं। ये तरंगें सबसे तेजी से यात्रा करती हैं और आमतौर पर कम नुकसान पहुंचाती हैं। ईईडब्ल्यू सिस्टम भूकंप के एपिसेंटर के पास इन्हीं शुरुआती पी-वेव्स को पकड़ लेता है।</p>



<p>इसके बाद, विनाशकारी तरंगों के पहुंचने से पहले ही दूर स्थित इलाकों में अलर्ट भेज दिया जाता है। इस तकनीक से प्रशासन और आम लोगों को सायरन बजाने या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए कुछ बेहद कीमती सेकंड मिल जाते हैं।</p>



<p>इस सिस्टम से मिलने वाला चेतावनी का समय इस बात पर पूरी तरह निर्भर करता है कि कोई शहर या इलाका भूकंप के केंद्र से कितनी दूर है।</p>



<p>इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप भूकंप के केंद्र के बिल्कुल करीब हैं, तो आपको चेतावनी का समय नहीं के बराबर मिलेगा। वहीं, अगर भूकंप का केंद्र सैकड़ों या हजारों किलोमीटर दूर है, तो बचाव के लिए कुछ अतिरिक्त और बेहद अहम सेकंड मिल सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारत में कहां लगे हैं सेंसर?</h2>



<p>भारत में यह सेंसर नेटवर्क मुख्य रूप से उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में स्थापित किया गया है। इन सेंसरों को जानबूझकर सक्रिय फॉल्ट जोन के बहुत करीब रखा गया है।</p>



<p>जब ये सेंसर पी-वेव्स को डिटेक्ट करते हैं, तो तेज झटके आने से पहले आसपास के शहरों में अलर्ट भेज देता&nbsp; है। दुनिया के अन्य देशों की बात करें तो फिलहाल जापान, ताइवान और अमेरिका के पास सबसे उन्नत भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणालियां मौजूद हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? समझें 14 हजार किमी दूर वेनेजुएला में आए भूकंप से क्या है कनेक्शन</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/67204</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:56:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारत के तेजी से बढ़ते तेल व्यापार के लिए नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया था, लेकिन यहां आए भूकंप के चलते बिजली कटौती, परिवहन व्यवस्था में बाधा और बंदरगाहों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भारत के तेजी से बढ़ते तेल व्यापार के लिए नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया था, लेकिन यहां आए भूकंप के चलते बिजली कटौती, परिवहन व्यवस्था में बाधा और बंदरगाहों पर आपातकालीन प्रतिबंधों के कारण माल ढुलाई कई दिनों या हफ्तों तक धीमी हो सकती है।</p>



<p>वेनेजुएला में यह आपदा ऐसे समय में आई है, जब मिडिल ईस्ट (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में तनाव के कारण भारत तेल आपूर्ति में व्यवधान का सामना कर रहा था। कुछ दिन पहले ही अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है, जिसके कारण उम्मीद जगी थी कि तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी व्यवधान आखिरकार कम हो जाएगा। लेकिन अब वेनेजुएला में आए तूफान ने भारत के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।</p>



<p>ईडीएमई इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल हेड ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज कुणाल खन्ना के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों के लिए वेनेजुएला हाल ही में कच्चे तेल के एक प्रमुख स्रोत के रूप में उभरा है। भारतीय रिफाइनरियों के लिए वेनेजुएला बहुत कम समय में एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बन गया है।</p>



<p>लेकिन यहां आए भूंकप से हुए नुकसान के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर भारत के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">वेनेजुएला से तेल आयात में आई थी बड़ी बढ़ोतरी</h2>



<p>मिडिल ईस्ट संकट के बीच भरतीय रिफाइनरी कंपनियों ने हाल के महीनों में वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में भारी वृद्धि की है। अप्रैल और मई के दौरान वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में भारी उझाल आया, जिससे वेनेजुएला भारत के सबसे महत्वपूर्ण कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है।</p>



<p>कुणाल खन्ना के अनुसार, वेनेजुएला में आए भूकंप के कारण भले निर्यात टर्मिनल सुरक्षित हैं, लेकिन बिजली गुल होने, सड़क और परिवहन नेटवर्क क्षतिग्रस्त होने और बंदरगाहों पर आपात प्रतिबंध लगने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। वेनेजुएला के प्रमुख कार्गो बंदरगाह ला गुआइरा को आपदा क्षेत्र घोषित किया जा चुका है। इससे शिपिंग और पोर्ट संचालन को लेकर चिंता बढ़ गई है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम?</h2>



<p>अब लोगों के मन में सवाल यह है कि क्या इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, इसका सीधा जवाब नहीं है। लेकिन इसके कारण जहाजों को माल लोड करने में अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। रूट बदलने के कारण डेमरेज शुल्क भी बढ़ सकता है।</p>



<p>शिपिंग में होने वाली देरी के कारण जहाजों का किराया और बीमा मिलकर तेल की लागत बढ़ा सकते हैं। इन अतिरिक्त खर्चों का सीधा असर कारोबारियों, रिफाइनरियों और बीमा कंपनियों पर पड़ेगा। इसके कारण सीधे तौर पर तो पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ सकते। लेकिन अगर भंकप के कारण उत्पन्न हुआ यह गतिरोध लंबा खींचता है तो भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी होगी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">बीमा कंपनियों के लिए भी चुनौती</h2>



<p>कुणाल खन्ना के अनुसार, वेनेजुएला से आने वाले जहाजों के लिए बीमा पॉलिसियां अब तक मुख्य रूप से भू-राजनीतिक और प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं. लेकिन अब भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं भी जोखिम का बड़ा कारण बन गई हैं। क्योंकि अब इस समुद्री मार्ग का आकलन प्राकृतिक आपदाओं के नजरिए से भी करना होगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">भारत के आर्थिक और परिचालन हितों पर असर</h2>



<p>इसके अलावा भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी विदेश ने भी वेनेजुएला के तेल परियोजनाओं में निवेश किया हुआ है। यदि लंबे समय तक उत्पादन या निर्यात प्रभावित रहता है तो भारत के आर्थिक और परिचालन हितों पर भी असर पड़ सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">पीएम मोदी और वेनेजुएला के बीच बातचीत</h2>



<p>हाल ही में पीएम मोदी ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से बातचीत की थी। पीएम मोदी और रोड्रिगेज ने भारतीय कंपनियों के लिए वेनेजुएला के खनन, महत्वपूर्ण खनिज, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर भी चर्चा की थी। हालांकि, अब भूकंप के कारण इन योजनाओं में बदलाव संभावना दिख रही है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अंबुबाची मेला 2026 समापन: 3 दिनों के अनुष्ठान के बाद कामाख्या मंदिर के खुले कपाट</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/67201</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:53:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म/अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[असम के गुवाहटी में निलांचल पहाड़ पर स्थित मां कामाख्या का पवित्र मंदिर, जहां बीते 22 जून की रात को मंदिर के कपाट तीन दिनों के लिए बंद कर दिए गए थे। इसके पीछे का कारण माता के राजस्वला होने का समय था। हर साल जब मंदिर तीन दिनों के लिए बंद होता है, तो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>असम के गुवाहटी में निलांचल पहाड़ पर स्थित मां कामाख्या का पवित्र मंदिर, जहां बीते 22 जून की रात को मंदिर के कपाट तीन दिनों के लिए बंद कर दिए गए थे। इसके पीछे का कारण माता के राजस्वला होने का समय था। हर साल जब मंदिर तीन दिनों के लिए बंद होता है, तो बाहर अंबुबाची मेले की शुरुआत होती है।</p>



<p>आज यानी 26 जून 2026 को शुद्धिकरण अनुष्ठान के बाद मंदिर के कपाट एक बार फिर से भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। हर साल कामाख्या मंदिर में माता के दर्शन और पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अंबुबाची मेले का महत्व</h2>



<p>मां कामाख्या के मंदिर में अंबुबाची मेला साल में केवल एक बार जून के महीने में ही लगता है। इस दौरान श्रद्धालु से लेकर संत-साधक और तंत्रिक बड़ी संख्या में मां के धाम के बाहर इक्ट्ठा होते हैं। यह मेला असम के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में शामिल है।</p>



<p>अंबुबाची मेले के दौरान मंदिर के कपाट 3 दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। किसी को भी इन तीन दिनों में मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है। माना जाता है कि, यह समय मां के मासिक धर्म और आराम करने का होता है। इस दौरान मंदिर में गर्भगृह में मौजूद शिला के सामने सफेद रंग का कपड़ा बिछाकर रख दिया जाता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अंबुबाची मेला समाप्त होने के बाद क्या अनुष्ठान किया जाता है?</h2>



<p>अंबुबाची मेला खत्म होने के बाद जब मंदिर का कपाट फिर से खोला जाता है, तो पहला दर्शन अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि, पहले दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं पर मां कामाख्या की विशेष कृपा रहती है। मेला खत्म होने के बाद कुछ जरूरी काम किए जाते हैं। इस दौरान मां कामाख्य का स्नान कराने के साथ दैनिक यज्ञ, पूजा, हवन एक बार फिर से शुरू किया जाता है।</p>



<p>मां कामाख्या को ताजे फल-फूल, मिठाइयां और खास तरह का भोग अर्पित किया जाता है। इसके अलावा श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में मां कामाख्या का राजस्वला वाला लाल कपड़ा दिया जाता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">प्रसाद के रूप में दिया जाता है पवित्र अंगवस्त्र</h2>



<p>अंबुबाची मेले समाप्त होने के बाद जब मंदिर के कपाट एक बार फिर से खुलते हैं, तो श्रद्धालुओं को मां अत्यंत पवित्र अंगोदक जिसे अंगवस्त्र भी कहते हैं, बांटा जाता है।</p>



<p>ये वही कपड़ा होता है, जिसे मंदिर के कपाट बंद करने के दौरान गर्भगृह में शिला के सामने बिछाया जाता है। 3 दिन बाद जब मंदिर के कपाट खुलते हैं, तो यह कपड़ा पूरी तरह से लाल हो जाता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मां कामाख्या शक्ति उपासना का केंद्र</h2>



<p>मां कामाख्या का मंदिर शक्ति उपासना करने के लिए प्रमुख माना जाता है। इस मंदिर में देवी की कोई भी मूर्ति स्थापित नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक शिला को पूजा जाता है, जिसे योनिकुंड के नाम से जाते हैं और जिससे लगातार जल बहता है।</p>



<p>माना जाता है कि, इसी जगह पर मां सती का योनि हिस्सा गिरा था, जिसकी वजह से यह जगह 51 शक्तिपीठ के रूप में काफी चर्चित है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>उत्तराखंड: गंभीर बीमार और पारिवारिक परिस्थितियों वाले प्रकरण छोड़ अन्य शिक्षकों के तबादले लटके</title>
		<link>https://satyakampost.com/archives/67197</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Satyakam Post]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2026 12:10:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। शासन ने गंभीर बीमारियों और विशेष पारिवारिक परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादलों को स्थानांतरण समिति के स्तर से नियमानुसार मंजूरी देने की अनुमति दे दी है, लेकिन दुर्गम से दुर्गम और सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में अनुरोध आधारित अन्य तबादलों पर फैसला &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>उत्तराखंड में शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। शासन ने गंभीर बीमारियों और विशेष पारिवारिक परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादलों को स्थानांतरण समिति के स्तर से नियमानुसार मंजूरी देने की अनुमति दे दी है, लेकिन दुर्गम से दुर्गम और सुगम से दुर्गम क्षेत्रों में अनुरोध आधारित अन्य तबादलों पर फैसला फिलहाल टल गया है।</p>



<p>शासन ने गंभीर बीमार और पारिवारिक परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादलों के प्रस्ताव को स्थानांतरण समिति के स्तर से किए जाने की मंजूरी दी है, लेकिन दुर्गम से दुर्गम एवं सुगम से दुर्गम क्षेत्र में अनुरोध वाले तबादले लटक गए हैं। शासन ने इन तबादलों पर फिर से विचार के लिए कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को प्रस्ताव भेजा है। वहीं, जिन तबादलों के लिए मंजूरी मिली है, वह भी ऐसे समय पर मिली, जब तबादलों के लिए एक सप्ताह से भी कम समय बचा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन को इसके लिए एक बार फिर समय बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है।</p>



<p>शिक्षा विभाग में शिक्षक पूरे साल दुर्गम से सुगम क्षेत्र में तबादलों के लिए तबादला एक्ट के तहत तबादले का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन पिछले साल जहां तबादला एक्ट के तहत शिक्षकों के तबादले नहीं हो पाए, वहीं सत्र 2026-27 में भी तबादलों के प्रस्तावों को ऐसे समय पर नियुक्ति प्राधिकारी के स्तर पर गठित तबादला समितियों को भेजने की मंजूरी मिली है, जब इसके लिए गिनती के कुछ दिन बचे हैं।</p>



<p>शासन ने जारी आदेश में कहा है कि धारा 27 के तहत चार प्रधानाचार्य, 91 प्रवक्ता, 97 सहायक अध्यापक एलटी गढ़वाल मंडल, 73 सहायक अध्यापक एलटी कुमाऊं मंडल के खुद, पति, पत्नी की गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, बीमार बच्चों, विधवा, विधुर, तलाकशुदा, परित्यक्ता, आपदा प्रभावित एवं माता-पिता की गंभीर बीमारी के आधार पर तबादले प्रस्ताव पर स्थानांतरण समितियां कार्रवाई करेगी। जबकि अनुरोध के आधार पर दुर्गम से दुर्गम और सुगम से दुर्गम क्षेत्र में तबादलों के लिए कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से परामर्श के बाद अगल से आदेश जारी किया जाएगा।</p>



<p><strong>तबादलों के लिए अंतिम तिथि 30 जून<br></strong>तबादला एक्ट के तहत शिक्षकों, कर्मचारियों के तबादलों के लिए अंतिम तिथि 10 जून है, लेकिन तय समय पर तबादलों की प्रक्रिया पूरी न होने से कार्मिक विभाग ने इसे बढ़ाकर 30 जून किया था, लेकिन शिक्षा विभाग में 30 जून तक तबादले संभव नहीं हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तबादलों के लिए शासन से और समय मांगा गया है। समय मिलने पर ही तबादले किए जा सकेंगे।</p>



<p><strong>तबादलों के लिए अब तक मुख्य निर्वाचन अधिकारी से भी नहीं ली गई अनुमति<br></strong>देहरादून। शिक्षा विभाग ने तबादलों के लिए प्रस्ताव को नियुक्ति प्राधिकारी के स्तर पर गठित तबादला समितियों को भेजने की मंजूरी दी हैं, लेकिन तबादलों के लिए अब तक मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से अनुमति नहीं ली गई। जबकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर से स्पष्ट निर्देश है कि राज्य में निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम चल रहा है। इस काम से जुड़े किसी भी अधिकारी का तबादला बिना आयोग की पूर्व अनुमति के न किया जाए।</p>



<p><strong>अनुरोध के आधार पर तबादलों के लिए मांगे जाएंगे नए आवेदन<br></strong>देहरादून। शिक्षा सचिव रविनाथ रामन के मुताबिक तबादलों के लिए मिले जिन प्रस्तावों को नियुक्ति प्राधिकारी के स्तर पर गठित तबादला समितियों को भेजा गया है, ये प्रस्ताव पिछले साल के हैं। तबादलों के इन प्रस्तावों के साथ नए आवेदन भी मांगे जाएंगे। वहीं, तबादलों के लिए कार्मिक विभाग से और समय मांगा जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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