नीले ड्रम कांड में फांसी की सजा: मुस्कान ने सौरभ से की थी लव मैरिज

मेरठ में नीले ड्रम कांड में पति का कत्ल करने के आरोप में दोषी मुस्कान (29) और सौरभ राजपूत (29) एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे। शुरुआत में परिवार राजी नहीं थे, लेकिन 2016 में सौरभ ने परिवार के खिलाफ जाकर मुस्कान से प्रेम विवाह कर लिया था। इसके बाद वह परिवार से अलग होकर मोहल्ले में ही किराये का मकान लेकर मुस्कान के साथ रहने लगा था। सौरभ पहले मर्चेंट नेवी और फिर मॉल में काम करता था। शादी के बाद उसने परतापुर की प्लाईवुड फैक्टरी में नौकरी की। 2019 में बेटी पीहू के जन्म के बाद सौरभ लंदन चला गया और वहां बेकरी में काम करने लगा। वह अपनी पत्नी पर अंधा भरोसा करता था। इसी बीच मुस्कान की जिंदगी में पुराने दोस्त साहिल (28) की दोबारा एंट्री हुई और दोनों में संबंध बन गए। ब्रह्मपुरी के विवेकानंद स्कूल में आठवीं क्लास तक साहिल और मुस्कान साथ पढ़े थे। वर्षों पहले दोनों के रास्ते अलग हो गए थे, लेकिन शराब और सूखे नशे की लत ने इन्हें दोबारा मिला दिया। 2021 में जब सौरभ को इस संबंध का पता चला तो उसने तलाक के कागज तैयार करवा लिए थे। हालांकि, बेटी पीहू के भविष्य को देखते हुए दोनों में साथ रहने की सहमति बनी। इसके बावजूद मुस्कान ने साहिल से मिलना बंद नहीं किया और दोनों ने मिलकर सौरभ की बेरहमी से हत्या कर दी। माता-पिता ने किया किनारा मुस्कान के माता-पिता ने उससे पूरी तरह नाता तोड़ लिया है। बुधवार को मुस्कान की मां कविता और पिता प्रमोद रस्तोगी जिला जज की कोर्ट पहुंचे। बेहद डरे और सदमे में दिख रहे माता-पिता ने जिला जज के नाम एक प्रार्थना पत्र कोर्ट के मुंशी को सौंपा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, कोर्ट मुस्कान और साहिल को जो भी सजा देगा, हमें पूरी तरह स्वीकार है। हमारा मुस्कान और साहिल से अब कोई संबंध नहीं है। यह पत्र सौंपने के बाद दोनों कुछ देर एक वकील के चैंबर में बैठे और फिर वहां से अपने घर ब्रह्मपुरी के लिए रवाना हो गए। मुस्कान ने नहीं खाया खाना वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, दोनों की बैरकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। मुस्कान की बैरक में दो महिला बंदी रक्षक और साहिल की बैरक में दो पुरुष बंदी रक्षक तैनात किए गए हैं। जेल के कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए दोनों पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जा रही है। रात करीब 7:00 बजे जब दोनों को रात का भोजन दिया गया तो दोनों ने खाना खाने से मना कर दिया। मुस्कान ने खाने की थाली में से सिर्फ थोड़ा सा खाना अपनी बेटी राधा को खिलाया और बाकी खाना बिना छुए एक तरफ रख दिया। कातिल मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने पति की हत्या करने वाली मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को बुधवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अपने फैसले में न्यायाधीश ने कहा कि प्रजा जब सोती है तब भी कानून जागता है। साहिल और मुस्कान तुमने सौरभ की हत्या की और उसके शव के टुकड़े करके उन्हें छुपा दिया। तुम्हें मृत्युदंड से दंडित किया जाता है। जिला जज के सजा सुनाते ही खचाखच भरे न्यायालय में भारत माता के जयकारे गूंजने लगे। जिला जज ने 30 सितंबर 2026 को 22 गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर और दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया था। बुधवार की सुबह सजा के बिंदु पर जिला अदालत में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकील के बीच बहस हुई। बचाव पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि दोनों दोषियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जेल में भी दोनों का आचरण अच्छा रहा है। इसलिए उन पर रहम किया जाए। बचाव पक्ष ने कोई चश्मदीद गवाह नहीं होने का भी हवाला दिया। वहीं, मुस्कान और साहिल की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी हुई। मुस्कान ने अपनी दोनों छोटी बेटियों के भविष्य का हवाला देते हुए अदालत से रहम की अपील की। कहा कि मेरी दो छोटी-छोटी बेटियां हैं, फैसला देते समय इनके भविष्य का ध्यान रखा जाए। जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि वारदात किसी उकसावे में आकर अचानक नहीं बल्कि अत्यंत शातिर तरीके से सोच-समझकर साजिश रचकर की गई है। मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या करने के बाद दोनों हाथों की कलाइयां काट दीं और सिर धड़ से काटकर अलग कर दिए। साक्ष्य छिपाने के लिए उसे ड्रम में भरकर सीमेंट से चिन दिया। यह अत्यंत क्रूर और बर्बर श्रेणी का अपराध है। इस वारदात से पूरे प्रदेश और देश में समाज के भीतर गहरा भय, असुरक्षा और अनिश्चितता का माहौल पैदा हुआ। पति-पत्नी जैसे पवित्र व विश्वासपूर्ण रिश्ता व पारिवारिक मूल्य तथा सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह हिल गए। नीला ड्रम समाज में खौफ का प्रतीक बन गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए दोनों दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला जज ने कहा कि दोनों दोषियों को उनकी बैरक में भेज दिया जाए। शाम लगभग 4:15 बजे जिला जज ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुना दी। सौरभ की मां बोलीं- अपराधियों को सही दंड मिला मुस्कान और साहिल को सजा सुनाने के दौरान बुधवार दोपहर सौरभ की मां रेनू देवी, उनके भाई बबलू व अन्य परिजन भी न्यायालय में मौजूद रहे। जिला जज के सजा सुनाते ही रेनू देवी व परिवार की अन्य महिलाओं की आंखों में आंसू छलकने लगे। सौरभ की मां रेनू देवी ने रोते हुए कहा कि मुस्कान और साहिल ने जैसा जघन्य अपराध किया है, उसके लिए उन्हें मृत्युदंड ही मिलना चाहिए था। अगर कानून में इससे भी बड़ी कोई सजा होती, तो वह उसकी मांग करतीं। सौरभ के भाई बबलू ने बताया कि इस हत्याकांड ने पूरे परिवार को भीतर से तोड़ दिया है। पिता मुन्ना लाल आज तक गहरे डिप्रेशन में हैं और मां चैन से सो नहीं पाई हैं। जिला न्यायालय के इस फैसले से उन्हें न्याय मिला है। यदि दोषी इस सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में जाते हैं, तो दोनों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए वे सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। नीले ड्रम में शव के टुकड़े चिनकर घूमने चले गए थे इंद्रानगर निवासी सौरभ ने ब्रह्मपुरी निवासी मुस्कान से 2016 में प्रेम विवाह किया था। सौरभ पहले मर्चेंट नेवी में थे फिर बाद में लंदन में नौकरी करने लगे थे। मुस्कान मेरठ में किराए के मकान में रहती थी। इसी दौरान मुस्कान के अपने पुराने दोस्त साहिल शुक्ला से करीबी संबंध बन गए। 24 फरवरी 2025 को सौरभ अपनी छह साल की बेटी और पत्नी मुस्कान का जन्मदिन मनाने के लिए लंदन से आए थे। संबंधों में बाधा बनने पर मुस्कान ने नशे की गोलियां देने के बाद प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर सौरभ की तीन मार्च 2025 की रात हत्या कर दी थी। उसके शव के टुकड़े नौले ड्रम में भरकर सीमेंट से चिन दिए और दोनों हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली और कसौल में घूमने चले गए थे। मुस्कान अपने साथ सौरभ का मोबाइल भी लेकर गई थी। वह यह दर्शाना चाहती थी कि वह सौरभ के साथ घूमने गई थी। दोनों के वहां से लौटने पर 18 मार्च 2025 को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा किया था। तभी से दोनों जेल में हैं। मुस्कान ने 24 नवंबर 2025 को जेल में दूसरी बेटी को जन्म दिया। बड़ी बेटी पीहू अपने नाना-नानी के पास रहती है। 12 मई 2025 को जांच पूरी कर करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। साक्ष्य छिपाने पर सात साल की सजा, जुर्माना भी जिला जज ने दोनों दोषियों को बीएनएस में हत्या की धारा 103 (1) और साझा इरादे के अपराध की धारा 3 (5) में मृत्युदंड व साक्ष्य छिपाने के अपराध बीएनएस की धारा 238 (ए) में सात वर्ष की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों दोषियों पर हत्या में 50-50 हजार रुपये और साक्ष्य छिपाने में 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड न जमा करने पर पांच और एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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