
बीते दिनों, मेघालय के शिलॉन्ग में एक आर्मी ट्रेनिंग सेंटर में दो अग्निवीर ट्रेनी जवानों की संदिग्ध मेनिंगोकोकल इन्फेक्शन से दुखद मौत हो गई थी। अस्पताल में भर्ती होने के कुछ ही घंटों के भीतर उनकी जान चली गई, जिसके बाद से ही स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट पर है।
इसे फैलने से रोकने के लिए पिछले दिनों मेघालय सरकार हेल्थ एडवाइजरी भी जारी कर चुकी है। असम रेजीमेंटल सेंटर और उसके आसपास के इलाकों में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, आइसोलेशन और फ्यूमिगेशन जैसे सख्त कदम उठाए जा रहे हैं ताकि इस बीमारी को रोका जा सके। आइए, इस आर्टिकल में डिटेल में समझते हैं कि आखिर क्या है मेनिंगोकोकल इन्फेक्शन और किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
क्या है मेनिंगोकोकल डिजीज?
मेनिन्जाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें दिमाग और रीढ़ की हड्डी के आसपास मौजूद टिश्यूज में सूजन आ जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह एक बड़ा वैश्विक स्वास्थ्य खतरा है जो कई तरह के बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और पैरासाइट्स के कारण हो सकता है।
इन सबमें बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस सबसे ज्यादा गंभीर और जानलेवा होता है, जिसका शरीर पर लंबे समय तक बुरा असर पड़ सकता है। ‘मेनिंगोकोकल’ भी एक प्रकार का बैक्टीरियल मेनिन्जाइटिस है, जो निसेरिया मेनिन्जाइटिडिस (Neisseria Meningitidis) नामक बैक्टीरिया से फैलता है और इसके लिए तुरंत मेडिकल इलाज की जरूरत होती है।
क्या हैं बीमारी के मुख्य लक्षण?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, मेनिंगोकोकल संक्रमण के कई गंभीर लक्षण हो सकते हैं। अगर ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
उल्टी और जी मिचलाना
तेज बुखार और सिरदर्द
गर्दन में अकड़न होना
त्वचा पर गहरे रंग के चकत्ते या रैशेज निकलना
चलने या सीधे खड़े होने में परेशानी होना
तेज रोशनी से आंखों को परेशानी होना
बहुत अधिक नींद आना या थकान लगना
भ्रम की स्थिति और चिड़चिड़ापन महसूस होना
दस्त, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, और भूख न लगना
किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा?
वैसे तो यह संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा काफी ज्यादा होता है। इनमें एक साल से कम उम्र के शिशु, किशोर और युवा शामिल हैं। इसके अलावा, जिन लोगों को स्प्लीन में चोट लगी है या इसे निकाल दिया गया है, या जिन्हें ‘सिकल सेल’ बीमारी है, वे भी अधिक खतरे में होते हैं। इसके अलावा, भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहने वाले, खास तरह की दवाएं लेने वाले या इस बीमारी से प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है।
बीमारी की गंभीरता और खतरे
अगर मरीज को तुरंत सही इलाज न मिले, तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। दुर्भाग्य से, कभी-कभी इलाज मिलने के बावजूद भी मरीज की जान जा सकती है। इस बीमारी के गंभीर परिणामों में ब्रेन डैमेज, किडनी खराब होना, शरीर के अंगों का काम न करना या खोना, नसों को नुकसान पहुंचना और पूरी तरह से सुनने की क्षमता का खत्म हो जाना शामिल है।
बचाव और रोकथाम के उपाय
इस खतरनाक संक्रमण से बचने के लिए कुछ सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है:
टीकाकरण: WHO के अनुसार, वैक्सीन इस बीमारी से बचने का सबसे बेहतरीन तरीका है। 11-12 साल की उम्र में बच्चों को मेनिंगोकोकल कंजुगेट (MenACWY) वैक्सीन लगवानी चाहिए और 16 साल की उम्र में इसका बूस्टर डोज लेना चाहिए। इसके अलावा, अतिरिक्त सुरक्षा के लिए MenB वैक्सीन भी दी जाती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि कोई भी एक वैक्सीन इसके सभी प्रकारों से सुरक्षा नहीं देती।
साफ-सफाई: बाथरूम का इस्तेमाल करने के बाद और खाना खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं। बिना हाथ धोए अपनी आंख, नाक या मुंह को न छुएं। खांसते या छींकते समय मुंह ढकें और अपना खाना, पीने का पानी, बर्तन, या लिपस्टिक जैसी चीजें दूसरों के साथ शेयर न करें। इसके अलावा, संक्रमण फैलने के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें, पर्याप्त आराम करें और बीमार महसूस होने पर घर पर ही रहें।
संपर्क में आने वालों का इलाज: अगर कोई व्यक्ति किसी संक्रमित मरीज के करीबी संपर्क (जैसे घर के सदस्य) में आया है, तो उसे 24 घंटे के भीतर ‘रिफैम्पिन’, ‘सिप्रोफ्लोक्सासिन’ या ‘सेफ्ट्रिएक्सोन’ जैसी एंटीबायोटिक दवाएं दी जानी चाहिए।



