कैलिफोर्निया में किसानों और टेक कंपनी के बीच रस्साकशी

AI का बूम दुनिया भर में डेटा सेंटर बनवा रहा है। लेकिन ये सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और पानी खाते हैं। इसी वजह से अब टेक कंपनियों और स्थानीय लोगों के बीच झगड़ा शुरू हो गया है। कंपनी और किसानों के बीच टकराव शुरू हो गया है।

कंपनी नदी के पानी के इस्तेमाल की मांग करते हुए कोर्ट चली गई है।

कंपनी बना रहे सबसे बड़ा डेटा सेंटर

दक्षिणी कैलिफोर्निया की इंपीरियल वैली में राज्य का सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर बन रहा है। ये 330 मेगावाट का प्रोजेक्ट है। पहले कंपनी ने वादा किया था कि वो कोलोराडो नदी का पानी नहीं लेगी। लेकिन अब कंपनी उसी नदी के 287 मिलियन गैलन पानी के लिए कोर्ट चली गई है।

कोलोराडो नदी 4 करोड़ लोगों के लिए पानी का स्त्रोत है। इंपीरियल वैली में तो यही मीठे पानी का एकमात्र जरिया है। यहां पहले से ही सूखे की समस्या है। राज्य का 80 प्रतिशत पानी किसान इस्तेमाल करते हैं।

कंपनी के मालिक सेबेस्टियन रूची का कहना है कि पानी की मांग नहीं बढ़ेगी। वो पास के खेतों से जमीन और पानी के अधिकार खरीद लेंगे और खेती बंद कर देगे। उस पानी से डेटा सेटर चलाएंगे। उनका कहना है नदी से एक बूंद अतिरिक्त पानी नहीं लगेगा। लेकिन स्थानीय लोग नाराज हैं।

रीसाइकिल पानी देने से किया मना

एल सेंट्रो और इंपीरियल शहरों ने रीसाइकिल पानी देने से मना कर दिया। पानी देने वाली सरकारी एजेंसी IID ने भी मांग ठुकरा दी। स्थानीय नेता एरिक रेयेस का कहना है कि ये IID को दरकिनार करने की साजिश है। मार्च में एक मीटिंग में लोग इतना भड़क गए कि मीटिंग रोकनी पड़ी।

पानी के जानकारों का कहना है कि मुद्दा सिर्फ पानी का नहीं है। सवाल ये है कि क्या खेती का पानी AI कंपनियों को दिया जाए।

किसानों का होगा नुकसान

खेती विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खेत बंद हुए तो नुकसान सिर्फ किसानों का नहीं होगा। ट्रैक्टर वाले, खाद बेचने वाले, टीचर और छोटे दुकानदारों की भी नौकरी जाएगी। वहीं कंपनी का दावा है कि इससे 1688 अस्थायी और 100 से ज्यादा पक्की नौकरी मिलेगी और 30 साल में 2.95 बिलियन डॉलर का फायदा होगा। इंपीरियल काउंटी में बेरोजगारी 17 प्रतिशत है

इस विवाद में जल विशेषज्ञ रेट लार्सन का कहना है कि हमारे पास बहुत अच्छे काम करने के लिए काफी पानी है। लेकिन हर अच्छे काम के लिए पानी नहीं है।

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