जेलेंस्की-नेतन्याहू की मुलाकात से 1914 जैसे हालात

रूस और यूक्रेन के बीच करीब चार साल से युद्ध चल रहा है। वहीं इस साल फरवरी में अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमला करने से मिडिल ईस्ट में भी युद्ध छिड़ गया।

ये दोनों युद्ध अलग-अलग भू-राजनीतिक घटनाओं के तौर पर चल रहे हैं, लेकिन मंगलवार को अमेरिका में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात ने कई तरह की अटकलों को शुरू कर दिया है।

रूस-ईरान के खिलाफ साथ लड़ेंगे इजरायल-यूक्रेन?

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगभग एक ही समय पर वाशिंगटन पहुंचे। वे दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए थे।

लिंडसे ग्राहम ईरान के खिलाफ अमेरिका के सख्त रुख के समर्थक थे। वहीं उन्होंने रूस के खिलाफ यूक्रेन की युद्ध नीतियों का भी समर्थन किया।

जेलेंस्की और नेतन्याहू की मुलाकात से व्हाइट हाउस दो ऐसे युद्धों के केंद्र में आ गया है जो तेजी से एक-दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं।

इस मुलाकात के साथ ही यह सवाल खड़ा हो गया है कि ये मुलाकात सिर्फ राजनीतिक तौर पर सीमित रहेगी या यह इन युद्धों को और ज्यादा हिंसक रूप दे देगी।

दुनिया में बन रहे 1914 जैसे हालात

कुछ इतिहासकार और राजनयिक का मानना है कि दुनिया में प्रथम विश्व युद्ध से पहले के 1914 से हालात बनते जा रहे हैं। इनका मानना है कि अलग-अलग क्षेत्रीय संकटों के गठबंधन, गलत अनुमान और तनाव बढ़ने की वजह से आपस में जुड़ने का जो खतरा तब था, वैसा ही कुछ अब भी दिखाई दे रहा है।

विश्लेषकों की इन बातों के पीछे की वजह कैस्पियन सागर में शुरू हुआ नया टकराव है। यह दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्देशीय जल निकाय है।

यूक्रेन ने ईरानी जहाज पर किया हमला

जेलेंस्की ने दावा किया कि यूक्रेनी सेना ने उन जहाजों पर हमला किया जो कथित तौर पर रूस और ईरान के बीच सैन्य सामान ले जा रहे थे। 

यूक्रेन की सुरक्षा सेवा ने बताया कि उन्होंने ईरानी ड्रोन और सैन्य आपूर्ति ले जाने वाले जहाजों के साथ-साथ रूस की अन्य सैन्य संपत्तियों को भी निशाना बनाया।

ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूक्रेन पर ईरानी जहाज पर हमला करने और एक नाविक की जान लेने का आरोप लगाया। अराघची ने यूक्रेन को चेतावनी देते हुए कहा, ‘इन हरकतों का जवाब जरूर दिया जाएगा।’

रूस-ईरान के बीच बढ़ रही दोस्ती

ईरान की वॉर्निंग पर यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने कहा, ‘ईरान के पास पीड़ित होने का दिखावा करने का कोई आधार नहीं है।’ कीव का कहना है कि ईरान ने मॉस्को को हथियार देकर सालों पहले ही यूक्रेन युद्ध में अपनी भागीदारी शुरू कर दी थी।

एंड्री सिबिहा ने दावा किया कि तेहरान 2022 से ही रूस को शाहिद ड्रोन और अन्य सैन्य तकनीक की आपूर्ति कर रहा है, ऐसे हथियार जिनसे यूक्रेनी नागरिकों की मौत हुई है।

पश्चिमी विश्लेषकों का कहना है कि रूस-ईरान के बीच सैन्य साझेदारी काफी गहरी हो गई है और इस दोस्ती ने यूरोप और पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्रों के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है।

जेलेंस्की की इजरायली पीएम से मुलाकात सीधे तौर पर राजनीतिक मकसद की ओर इशारा कर रही है। कुछ जानकारों का कहना है कि कीव, वाशिंगटन को यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि यूक्रेन की मदद करना अब सिर्फ पूर्वी यूरोप की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि ईरान के क्षेत्रीय सैन्य नेटवर्क के एक अहम हिस्से को कमजोर करने का भी मामला है।

क्विंसी इंस्टीट्यूट के ट्रिटा पारसी ने कहा है कि यूक्रेन शायद इन दोनों संघर्षों को रणनीतिक रूप से एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है, ताकि कीव को समर्थन मिले और इसे तेहरान के साथ व्यापक टकराव से अलग न किया जा सके।

ट्रंप की क्या है प्लानिंग?

इन सभी बातों के बीच यह भी सामने है कि राष्ट्रपति ट्रंप तीखे बयानों का दौर कम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने जेलेंस्की की बात पर रूस से जवाब मांगा है।

जेलेंस्की ने दावा किया था कि रूस ने शायद सैटेलाइट इंटेलिजेंस के जरिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने में ईरान की मदद की है। इस पर ट्रंप ने सोमवार, 27 जुलाई को कहा कि वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस आरोप पर बात करना चाहते हैं।

ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि वे ऐसा कर रहे हैं, कम से कम ऊंचे स्तर पर तो बिल्कुल नहीं। अगर ऐसी कोई मदद दी भी गई थी, तो उसका असर बहुत कम रहा होगा।’

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका के पास खुद की इंटेलिजेंस जानकारी है जिससे वह कोई फैसला ले सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह नपा-तुला जवाब व्यापक कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश को दिखा रहा है।

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