
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का लगभग आधा सफर पूरा हो चुका है। इस बीच, सरकार कामकाज की समीक्षा और भविष्य की रणनीतियों को धार देने के लिए एक बार फिर पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले सप्ताह होने वाले दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ से पहले मंत्रियों के कई विशेष समूह बनाने का निर्देश दिया है।
क्या है मंत्रियों के नए समूह और उनका काम?
पीएम मोदी ने मंत्रियों के यानी 6 से ज्यादा समूह बनाने के निर्देश दिए हैं।
प्रत्येक समूह में 8-8 मंत्री शामिल होंगे।
ये समूह मुख्य रूप से तीन प्रमुख मुद्दों पर गहन मंथन करेंगे—
मंत्रियों और उनके विभागों की कार्यप्रणाली में व्यक्तिगत और प्रशासनिक सुधार।
जनता और सरकार के बीच संवाद को और बेहतर व प्रभावी बनाना।
सरकारी योजनाओं और नीतियों के क्रियान्वयन में कसावट लाना।
कब और कहां होगा यह ‘चिंतन शिविर’?
बता दें कि यह दो दिवसीय चिंतन शिविर ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन अगले हफ्ते प्रस्तावित है। गौर करने वाली बात यह है कि इसी तरह का एक ‘चिंतन शिविर’ 21 अक्टूबर 2021 को भी आयोजित किया गया था, जब दूसरे कार्यकाल में कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हुआ था।
उस समय का शिविर गवर्नेंस और पॉलिसी मेकिंग पर केंद्रित था, जिसमें विभिन्न मंत्रियों ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अलग-अलग प्रस्तुतियां दी थीं।
इस चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस बात बात को ऐसे समझिए कि आगामी बैठक भी पिछले सत्र के फॉर्मेट पर ही आधारित होगी, जिसमें अलग-अलग समूहों द्वारा विषय-आधारित चर्चा और प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
इस बार के चिंतन शिविर के आयोजन का उद्देश्य सरकार के अब तक के कामकाज और नीतियों का जायजा लेना। विभिन्न मंत्रालयों के बीच आपसी समन्वय और तालमेल को मजबूत करना और सरकार के आगामी कार्यकाल की प्राथमिकताओं और रोडमैप को तैयार करना है।
मंत्रालयों से मांगी गई रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में सभी मंत्रालयों से यह रिपोर्ट मांगी गई थी कि उन्होंने 2021 के पिछले चिंतन शिविर की सिफारिशों पर अब तक क्या-क्या कदम उठाए हैं। इसके अलावा मंत्रालयों को कई कड़े निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके तहत सभी मंत्रालयों को अपनी गतिविधियों का एक ‘लाइव डैशबोर्ड’ तैयार करने को कहा गया है ताकि प्रगति पर सीधी नजर रखी जा सके। कर्मचारियों के साथ नियमित बैठकें कर सुझाव और फीडबैक लेने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह इस बात का संकेत है कि सरकार किसी भी समय मंत्रालयों के कामकाज की प्रगति की समीक्षा कर सकती है।



