जेलेंस्की और ट्रंप के बीच आर-पार की जंग! अमेरिका ने दी थी चेतावनी

रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण संघर्ष के पांच साल होने वाले हैं। स्थिति यह है कि आज भी यह संघर्ष खत्म होने के बजाय और भयावह रूप लेता नजर आ रहा है। हालांकि अब इस संघर्ष में एक चौंकाने वाला और नया मोड़ सामने आया है। दरअसल, अब इस बात की संभावना ज्यादा तेज हो गई है कि इस लड़ाई में सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप कूद सकते हैं और चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप इस बार यूक्रेन की तरफ से नहीं, बल्कि उसके खिलाफ इस संघर्ष में कूद सकते हैं। अब सवाल है कि रूस के खिलाफ हमेशा से आग उगलने वाले ट्रंप अचनाक पुतिन के साथ कैसे हो गए? आखिर वो क्या है, जिससे अब ट्रंप और जेलेंस्की आमने-सामने होंगे? आइए जानते हैं। पहले समझिए संघर्ष की ताजा कहानी बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध में नया मोड़ तब आया, जह ऊर्जा ठिकानों पर हुए थोड़े समय के संघर्षविराम को तोड़ते हुए यूक्रेन ने रूस के रियाजान क्षेत्र में स्थित एक ऑयल रिफाइरी पर जोरदार ड्रोन हमला कर दिया है। इस हमले के बाद से रिफाइरी में भीषण आग लग गई। इस घटना ने एक तरफ जहां युद्ध को फिर से भड़का दिया है, वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के रिश्तों में खटास और गहरी कर दी है। क्यों टूटा संघर्षविराम और क्या है पूरा विवाद? इस बात को ऐसे समझिए कि पिछले रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दोनों पक्षों से ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हमले रोकने की मांग की थी। यूक्रेन ने तो ट्रंप की इस बात का मान रखा, लेकिन यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की का आरोप है कि रूस ने इस मांग की कोई परवाह नहीं की और लगातार यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों पर हवाई बमबारी जारी रखी। यूक्रेन का कहना है कि एक तरफ उसने ट्रंप के कहने पर संघर्षविराम का पालन किया, लेकिन इसके बदले पिछले कुछ दिनों में पश्चिमी देशों ने रूस की बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से जुड़ी खुफिया जानकारी देना बंद कर दिया और अमेरिकी ‘स्टारलिंक’ कम्युटिकेशन टर्मिनलों के इस्तेमाल पर भी पाबंदियां लगा दीं। ये दोनों चीजें यूक्रेनी सेना के लिए बेहद अहम हैं। अब बस बहुत हो गया- जब जेलेंस्की का छलका दर्द इन सब बातों से आहत राष्ट्रपति जेलेंस्की ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में साफ कह दिया कि उनका धैर्य अब जवाब दे चुका है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि अब हम चुप नहीं बैठेंगे और इसके साथ ही रूस की ऑयल रिफाइरी पर हमलों के फिर से शुरू होने की घोषणा कर दी। अब समझिए जमीन पर क्या हालात हैं? रूसी रक्षा मंत्रालय और रियाजान के गवर्नर पावेल माल्कोव के मुताबिक, मॉस्को से लगभग 300 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित इस रिफाइरी पर ड्रोन हमले के बाद आग लग गई। हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव का दावा है कि यूक्रेन ने कभी रिफाइरी पर हमले रोके ही नहीं थे, जिससे रूस को नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि नुकसान केवल रूस का नहीं हुआ है। तबाही यूक्रेन में भी बराबर मची है। यूक्रेन के किरोवोग्राद क्षेत्र में पिछले 10 घंटों से अधिक समय तक चले भीषण रूसी ड्रोन हमले में 3 लोगों की मौत हो गई और 6 अन्य लोग घायल हो गए। अब समझिए ब्रसेल्स में कूटनीतिक हलचल के मायने अमेरिका के रुख से बढ़ती दूरियों और समर्थन वापस लेने की आशंकाओं के बीच, राष्ट्रपति जेलेंस्की गुरुवार को ब्रसेल्स पहुंचे। वहां उन्होंने यूरोपीय संघ (EU) के नेताओं के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने नाटो प्रमुख मार्क रूट, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन और पोलैंड, डेनमार्क व बेल्जियम के प्रधानमंत्रियों से मुलाकात कर मौजूदा सुरक्षा हालात पर चर्चा की। क्या ट्रंप प्रशासन से अलग हो रहा है यूक्रेन का रास्ता? इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कीव और वाशिंगटन के रिश्ते फिर से एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद से ही युद्ध समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाए जा रहे थे, लेकिन जमीन पर जमीनी हकीकतें और रूस के आक्रामक रुख ने इस कूटनीति को बड़ा झटका दिया है। ऐसे में जब युद्ध के मैदान में एक देश अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा हो, तब ऊर्जा और संचार के साधनों पर पाबंदियां लगना और खुफिया जानकारी रोकना उस देश को अकेले छोड़ने जैसा महसूस कराता है। अब गौर करने वाली बात यह है कि जेलेंस्की का यह कदम सिर्फ एक रिफाइरी पर हमला नहीं है, बल्कि यह अमेरिका और पश्चिमी सहयोगियों को एक कड़ा संदेश है कि यूक्रेन अपनी रक्षा के लिए किसी भी समझौते के आगे घुटने नहीं टेकेगा।

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